न जाने क्यूँ खुवाब बुनती गई
न जाने क्यूँ आँखें देखने को तरसती रही
न जाने क्यूँ सोचती तुम्हे
न जाने क्यूँ सपने में करती भेंट
न जाने क्यूँ यादें उभरती रही
न जाने क्यूँ बीन कहे समझ गये
न जाने क्यूँ आस लिए बैठी रही
न जाने क्यूँ तुम्हारी लब्ज़ सुनने को विवश
न जाने क्यूँ मन कहती अपनी ;
न जाने क्यूँ सोचती आयेगी तुम
न जाने क्यूँ खामोश रहकर भी कई सवाल उठती
न जाने क्यूँ लगती मुझे................
न जाने क्यूँ आँखें देखने को तरसती रही
न जाने क्यूँ सोचती तुम्हे
न जाने क्यूँ सपने में करती भेंट
न जाने क्यूँ यादें उभरती रही
न जाने क्यूँ बीन कहे समझ गये
न जाने क्यूँ आस लिए बैठी रही
न जाने क्यूँ तुम्हारी लब्ज़ सुनने को विवश
न जाने क्यूँ मन कहती अपनी ;
न जाने क्यूँ सोचती आयेगी तुम
न जाने क्यूँ खामोश रहकर भी कई सवाल उठती
न जाने क्यूँ लगती मुझे................